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अथर्ववेद 1.53

व॒र्षमाज्यं॑ घ्रं॒सो अ॒ग्निर्वेदि॒र्भूमि॑रकल्पत ।
तत्रै॒वान् पर्व॑तान॒ग्निर्गी॒र्भिरू॒र्ध्वाँ अ॑कल्पयत् ॥५३॥

पूरा अध्याय