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अथर्ववेद 1.21

यं त्वा॒ पृष॑ती॒ रथे॒ प्रष्टि॒र्वह॑ति रोहित । शु॒भा या॑सि रि॒णन्न॒पः ॥२१॥

पूरा अध्याय