अथर्ववेद 1.15
आ त्वा॑ रुरोह बृह॒त्यू३त प॒ङ्क्तिरा क॒कुब् वर्च॑सा जातवेदः ।
आ त्वा॑ रुरोहोष्णिहाक्ष॒रो व॑षट्का॒र आ त्वा॑ रुरोह॒ रोहि॑तो॒ रेत॑सा स॒ह ॥१५॥
आ त्वा॑ रुरोह बृह॒त्यू३त प॒ङ्क्तिरा क॒कुब् वर्च॑सा जातवेदः ।
आ त्वा॑ रुरोहोष्णिहाक्ष॒रो व॑षट्का॒र आ त्वा॑ रुरोह॒ रोहि॑तो॒ रेत॑सा स॒ह ॥१५॥