ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 12सूक्त 55.43अथर्ववेद 5.43छि॒नत्त्य॑स्य पितृब॒न्धु परा॑ भावयति मातृब॒न्धु ॥४३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय