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अथर्ववेद 4.5

प॒दोर॑स्या अधि॒ष्ठाना॑द् वि॒क्लिन्दु॒र्नाम॑ विन्दति ।
अ॒ना॒म॒नात् सं शी॑र्यन्ते॒ या मुखे॑नोप॒जिघ्र॑ति ॥५॥

पूरा अध्याय