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अथर्ववेद 4.47

त्रीणि॒ वै व॑शाजा॒तानि॑ विलि॒प्ती सू॒तव॑शा व॒शा।
ताः प्र यच्छेद् ब्र॒ह्मभ्यः॒ सोऽनाव्र॒स्कः प्र॒जाप॑तौ ॥४७॥

पूरा अध्याय