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अथर्ववेद 4.44

वि॒लि॒प्त्या बृ॑हस्पते॒ या च॑ सू॒तव॑शा व॒शा।
तस्या॒ नाश्नी॑या॒दब्रा॑ह्मणो॒ या आ॒शंसे॑त॒ भूत्या॑म् ॥४४॥

पूरा अध्याय