अथर्ववेद 2.22
इ॒मे जी॒वा वि मृ॒तैराव॑वृत्र॒न्नभू॑द् भ॒द्रा दे॒वहु॑तिर्नो अ॒द्य।
प्राञ्चो॑ अगाम नृ॒तये॒ हसा॑य सु॒वीरा॑सो वि॒दथ॒मा व॑देम ॥२२॥
इ॒मे जी॒वा वि मृ॒तैराव॑वृत्र॒न्नभू॑द् भ॒द्रा दे॒वहु॑तिर्नो अ॒द्य।
प्राञ्चो॑ अगाम नृ॒तये॒ हसा॑य सु॒वीरा॑सो वि॒दथ॒मा व॑देम ॥२२॥