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अथर्ववेद 2.14

संक॑सुको॒ विक॑सुको निरृ॒थो यश्च॑ निस्व॒रः ।
ते ते॒ यक्ष्मं॒ सवे॑दसो दू॒राद् दू॒रम॑नीनशन् ॥१४॥

पूरा अध्याय