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अथर्ववेद 8.19

स्वप्नो॒ वै त॒न्द्रीर्निरृ॑तिः पा॒प्मानो॒ नाम॑ दे॒वताः॑ ।
ज॒रा खाल॑त्यं॒ पालि॑त्यं॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन् ॥१९॥

पूरा अध्याय