ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 11सूक्त 33.57अथर्ववेद 3.57तेनै॑नं॒ प्राशि॑षं॒ तेनै॑नमजीगमम् ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय