ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 11सूक्त 33.155अथर्ववेद 3.155तयै॑नं॒ प्राशि॑षं॒ तयै॑नमजीगमम् ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय