ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 11सूक्त 33.127अथर्ववेद 3.127ताभ्या॑मेनं॒ प्राशि॑षं॒ ताभ्या॑मेनमजीगमम् ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय