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अथर्ववेद 2.5

मुखा॑य ते पशुपते॒ यानि॒ चक्षूं॑षि ते भव ।
त्व॒चे रू॒पाय॑ सं॒दृशे॑ प्रती॒चीना॑य ते॒ नमः॑ ॥५॥

पूरा अध्याय