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अथर्ववेद 1.29

अ॒ग्नौ तुषा॒ना व॑प जा॒तवे॑दसि प॒रः क॒म्बूकाँ॒ अप॑ मृड्ढि दू॒रम्।
ए॒तं शु॑श्रुम गृहरा॒जस्य॑ भा॒गमथो॑ विद्म॒ निरृ॑तेर्भाग॒धेय॑म् ॥२९॥

पूरा अध्याय