ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 10सूक्त 77.23अथर्ववेद 7.23यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वा नि॒धिं रक्ष॑न्ति सर्व॒दा। नि॒धिं तम॒द्य को वे॑द॒ यं दे॑वा अभि॒रक्ष॑थ ॥२३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय