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अथर्ववेद 5.38

२॥
दिशो॒ ज्योति॑ष्मतीर॒भ्याव॑र्ते ।
ता मे॒ द्रवि॑णं यच्छन्तु॒ ता मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम् ॥३८॥

पूरा अध्याय