ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 10सूक्त 1010.14अथर्ववेद 10.14सं हि वाते॒नाग॑त॒ समु॒ सर्वैः॑ पत॒त्रिभिः॑ । व॒शा स॑मु॒द्रे प्रानृ॑त्य॒दृचः॒ सामा॑नि॒ बिभ्र॑ती ॥१४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय