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अथर्ववेद 11.3

सू॒षा व्यू॑र्णोतु॒ वि योनिं॑ हापयामसि ।
श्र॒थया॑ सूषणे॒ त्वमव॒ त्वं बि॑ष्कले सृज ॥३॥

पूरा अध्याय